अंतर्राष्ट्रीय नेल्सन मडेला दिवस
अंतर्राष्ट्रीय नेल्सन मडेला दिवस नेल्सन मडेला के सम्मान में एक वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है, प्रत्येक वर्ष 18 जुलाई को मंडेला के जन्मदिन पर मनाया जाता है। नवंबर 2009 में ते एकजुट राष्ट्रों द्वारा आधिकारिक तौर पर दिन घोषित किया गया था, 18 जुलाई 2010 को आयोजित संयुक्त राष्ट्र मंडेला दिवस के साथ। हालांकि, अन्य समूहों ने 18 जुलाई 2009 को मंडेला दिवस मनाना शुरू किया।
नेल्सन रोलीह्लला मंडेला दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत भूतपूर्व राष्ट्रपति थे। रोलीह्लला मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को पूर्वी केप में म्वेज़ो गाँव के मदीबा कबीले में हुआ था। उनकी माँ नोनकापी नोसेनकी थीं और उनके पिता नाकोसी मुफ्फिसिस्वा गडला मंडेला थेम्बू लोगों के अभिनय राजा के मुख्य सलाहकार थे। सन 1930 में, जब वह 12 साल के थे , तब उनके पिता की मृत्यु हो गई और युवा रोलीहलला मक्केज़वेनी में ग्रेट प्लेस में जोंगिन्ताबा का वार्ड बन गया।
प्रतिरोध के युद्धों के दौरान अपने पूर्वजों की वीरता की कहानियों को सुनकर, उन्होंने अपने लोगों के स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने का भी सपना देखा।
उन्होंने कुनु में प्राथमिक स्कूल में भाग लिया जहाँ उनके शिक्षक, मिस मेंडिंगन ने उन्हें सभी स्कूली बच्चों को "ईसाई" नाम देने के रिवाज़ के अनुसार नेल्सन नाम दिया।
राजनीति जीवन
1941 में मंडेला जोहन्सबर्ग चले गये जहाँ इनकी मुलाकात वॉल्टर सिसुलू और वॉल्टर एल्बरटाइन से हुई। उन दोनों ने राजनीतिक रूप से मंडेला को बहुत प्रभावित किया। जीवनयापन के लिये वे एक कानूनी फ़र्म में क्लर्क बन गये परन्तु धीर-धीरे उनकी सक्रियता राजनीति में बढ़ती चली गयी। रंग के आधार पर होने वाले भेदभाव को दूर करने के उन्होंने राजनीति में कदम रखा। 1944 में वे अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गये जिसने रंगभेद के विरूद्ध आन्दोलन चला रखा था। इसी वर्ष उन्होंने अपने मित्रों और सहयोगियों के साथ मिल कर अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना की। 1947 में वे लीग के सचिव चुने गये। 1961 में मंडेला और उनके कुछ मित्रों के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा चला परन्तु उसमें उन्हें निर्दोष माना गया।
5 अगस्त 1962 को उन्हें मजदूरों को हड़ताल के लिये उकसाने और बिना अनुमति देश छोड़ने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया। उन पर मुकदमा चला और 12 जुलाई 1964 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनायी गयी। सज़ा के लिये उन्हें रॉबेन द्वीप की जेल में भेजा गया किन्तु सजा से भी उनका उत्साह कम नहीं हुआ। उन्होंने जेल में भी अश्वेत कैदियों को लामबन्द करना शुरू कर दिया था। जीवन के 27 वर्ष कारागार में बिताने के बाद अन्ततः 11 फ़रवरी 1990 को उनकी रिहाई हुई। रिहाई के बाद समझौते और शान्ति की नीति द्वारा उन्होंने एक लोकतान्त्रिक एवं बहुजातीय अफ्रीका की नींव रखी।
1994 में दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद रहित चुनाव हुए। अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस ने 62 प्रतिशत मत प्राप्त किये और बहुमत के साथ उसकी सरकार बनी। 10 मई 1994 को मंडेला अपने देश के सर्वप्रथम अश्वेत राष्ट्रपति बने। दक्षिण अफ्रीका के नये संविधान को मई 1996 में संसद की ओर से सहमति मिली जिसके अन्तर्गत राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारों की जाँच के लिये कई संस्थाओं की स्थापना की गयी। 1997 में वे सक्रिय राजनीति से अलग हो गये और दो वर्ष पश्चात् उन्होंने 1999 में कांग्रेस-अध्यक्ष का पद भी छोड़ दिया।
नेल्सन मंडेला बहुत हद तक महात्मा गाँधी की तरह अहिंसक मार्ग के समर्थक थे। उन्होंने गांधी को प्रेरणा स्रोत माना था और उनसे अहिंसा का पाठ सीखा था।
नवम्बर 2009 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रंगभेद विरोधी संघर्ष में उनके योगदान के सम्मान में उनके जन्मदिन (18 जुलाई) को 'मंडेला दिवस' घोषित किया। 67 साल तक मंडेला के इस आन्दोलन से जुड़े होने के उपलक्ष्य में लोगों से दिन के 24 घण्टों में से 67 मिनट दूसरों की मदद करने में दान देने का आग्रह किया गया।मंडेला को विश्व के विभिन्न देशों और संस्थाओं द्वारा 250 से भी अधिक सम्मान और पुरस्कार प्रदान किए गए हैं:
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1993 में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रेडरिक विलेम डी क्लार्क संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार
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प्रेसीडेंट मैडल ऑफ़ फ़्रीडम
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ऑर्डर ऑफ़ लेनिन
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भारत रत्न
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निशान-ए-पाकिस्तान
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23 जुलाई 2008 को गाँधी शांति पुरस्कार
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